रविवार, 7 नवंबर 2010

प्रतिवेदन

गीत गाले  मधुर ,भूल  करके उदय   ,
रात तेरी,  सुबह  , कल तुम्हारा ना हो -------

चांदनी है  खिली नील   अम्बर   सजा ,
कर ले रोशन हृदय ,कल उजारा ना हो -------

प्रणय गीत गाया  ,हर गम भूलकर  ,
लगे उत्सव हमारा ,हमारा  ना हो ----------

पथ में आना, ना आना ,तेरी मर्जी उदय ,
चल पड़े तो चलो ,कल   सहारा  ना   हो-------

जश्न ,  महफ़िल , बनीं तेरी उचाईयां  ,
जाये किस्ती किधर, जब किनारा ना हो  ------- 

होश ,मदहोश करने को जाम आ गए ,
जब तक उतरे नशा ,घर तुम्हारा ना हो ---------

राग ,यौवन, दमक, रूप,  मदहोशियाँ ,
जब जाये उतर ,बे -सहारा    ना   हो ------------

प्रीत बदलो  ना अपनी, वसन कि तरह  ,
आज सूरज तेरा कल ,सितारा  ना हो  ----------

                                   उदय वीर सिंह .
                                   ६/११/ २०१०  .

1 टिप्पणी:

अशोक बजाज ने कहा…

'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय ' यानी कि असत्य की ओर नहीं सत्‍य की ओर, अंधकार नहीं प्रकाश की ओर, मृत्यु नहीं अमृतत्व की ओर बढ़ो ।

दीप-पर्व की आपको ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं ! आपका - अशोक बजाज रायपुर

ग्राम-चौपाल में आपका स्वागत है
http://www.ashokbajaj.com/2010/11/blog-post_06.html