रविवार, 24 जुलाई 2011

**संजीदा **

                                                                       
चिराग-ए-लियाकत ,कदम रहबरी के ,
जुदा  तुमको  दिल से नहीं कर सकेंगे --


रहोगे   सदा    तुम   दिलों   में  हमारे ,
रुसवा   तुम्हें   हम  नहीं   कर  सकेंगे --

लिखी है इबारत,मुकाम-ए-मुकम्मल ,
बिना    रोशनी   के   नहीं  पढ़   सकेंगे --

माना मुकद्दर  न  लिखता है  गुलशन ,
गुलशन बिना  गुल  कहाँ खिल सकेंगे --

सरहद  न हो   कोई ,खुशियों  की  तेरी ,
कायम   सदा  हो   दुआ  ,हम     करेंगे --

मेरे   हम  कदम ,तुम शरीके  मुहब्बत
जो  तुमने किया ,हम नहीं कर सकेंगे --

जाना    है    तुमको , बेशक   चला  जा ,
रुखसत   तुम्हें   ,हम  नहीं  कर सकेंगे --

                                    उदय वीर सिंह

                                      23/07/2011



18 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kumar ने कहा…

दो लाइनों मे दिल ले लिया आपने,उदय भाई.
आभार.
मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है.

सतीश सक्सेना ने कहा…

बेहतरीन श्रद्धांजलि .....
आभार आपका !

Rakesh Kumar ने कहा…

दो की चौदह हुईं,मजा आ गया.
अंतिम दो की क्या बात है


जाना है तुमको , बेशक चला जा ,
रुखसत तुम्हें ,हम नहीं कर सकेंगे --

मनोज कुमार ने कहा…

एक भावभीनी रचना, जो दिल को छू गई।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

जाना है तुमको , बेशक चला जा ,
रुखसत तुम्हें ,हम नहीं कर सकेंगे

खूबसूरत ग़ज़ल...

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल भाई उदयवीर जी बधाई और शुभकामनायें |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल भाई उदयवीर जी बधाई और शुभकामनायें |

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग इस ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो हमारा भी प्रयास सफल होगा!

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' ने कहा…

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 26-07-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर मंगलवारीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

Rajesh Kumari ने कहा…

charcha manch ke madhyam se pahli bar aapke blog par aai hoon aapki ghazal padhi bahut achchi lagi.behtreen hai.yese hi likhte rahiye.mere blog par bhi aapka swagat hai.

anu ने कहा…

मेरे हम कदम ,तुम शरीके मुहब्बत
जो तुमने किया ,हम नहीं कर सकेंगे --

जाना है तुमको , बेशक चला जा ,
रुखसत तुम्हें ,हम नहीं कर सकेंगे --


खूबसूरत शेर ...उम्दा...

अरूण साथी ने कहा…

दिल को छू कर निकल गई।
बहुत खूब...

दर्द को शब्दों के सांचे में ढाल दिया है ।

सागर ने कहा…

bhaut hi khubsurat shabdo se rachi gazal....

ZEAL ने कहा…

सरहद न हो कोई ,खुशियों की तेरी ,
कायम सदा हो दुआ ,हम करेंगे --

Great lines !

The couplet is reflecting the poet's pious heart . Amazed at this beautiful creation .

Badhaii Udar ji .

.

रेखा ने कहा…

उम्दा गजल

रविकर ने कहा…

सुन्दर रचना ||

Dorothy ने कहा…

खूबसूरत गजल...आभार.
सादर,
डोरोथी.

वीना ने कहा…

बहुत खूब...