गुरुवार, 4 अगस्त 2011

मिले तो शहीदी

हजारों  जनम  हों,  फिर  भी  ये   कम हैं ,
जब  भी  जनम  लें ,वतन  पर  फ़िदा हों ---

इश्क -ए  - आजादी  , मुकद्दर   में  आये ,
युगों  तक  सलामत ,  कभी  न  जुदा हों --

कदम    रहबरी    के  ,  शहीदों     तुम्हारे ,
मेरे   हमसफ़र  मेरे  दिल    में  सदा   हों  --

सेल्युलर की गोंद और जलियाँ का आंगन ,
चुन   लेंगे   हम   चाहे  ,रब  भी  खफा   हों --

सदमें   में   गम   है , सितम   खौफ  में  है ,
वजूद - ए-  क़ज़ा  क्या , रजा -ए- खुदा हों --

काफिला-ए-दीवाने ,कफ़न  सिर पर बांधे,
प्रीत सरहद से  लागी,हंसकर अलविदा हों --

शहीदी   मुकद्दर   में , मिलती  न  सबको ,
इल्तजा  है  उदय , राह -ए  माये फ़ना  हों --

                                            उदय वीर सिंह .
                                             ०४/०८/२०११.

10 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

काफिला-ए-दीवाने ,कफ़न सिर पर बांधे,
प्रीत सरहद से लागी,हंसकर अलविदा हों --
kaafi badhiya

Suresh Kumar ने कहा…

हजारों जनम हों, फिर भी ये कम हैं ,
जब भी जनम लें ,वतन पर फ़िदा हों ---
Udaya Ji.. "Jai Hind, Jai Bharat"

ऐ वतन,
मेरी हर तमन्ना में तू, तुझसे प्यार करता हूं..
ये जनम काफ़ी नही, हर जनम तुझपे वार करता हूं..

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव ।

सतीश सक्सेना ने कहा…

हजारों जनम हों, फिर भी ये कम हैं ,
जब भी जनम लें ,वतन पर फ़िदा हों ---

बेहद खूबसूरत लाइनें ...शुभकामनायें भाई जी !

सागर ने कहा…

deshbhakti ke prem se paripurn....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

देशप्रेम से औत-प्रोत सुन्दर रचना!

: केवल राम : ने कहा…

इश्क -ए - आजादी , मुकद्दर में आये ,
युगों तक सलामत , कभी न जुदा हों --

भावों का सहज सम्प्रेषण .....ओज गुण प्रधान रचना ....आपका आभार

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर...बधाई

वीना ने कहा…

काफिला-ए-दीवाने ,कफ़न सिर पर बांधे,
प्रीत सरहद से लागी,हंसकर अलविदा हों--

बहुत बढ़िया...

Kunwar Kusumesh ने कहा…

kya baat kahi hai,vaah.