शनिवार, 3 सितंबर 2011

औचित्य

चुभ  गयी  कलम ,
रिसने  लगा  खून '
लिखने   लगा.......
बनने से विखरने तक की
 गाथा ......
जब  तक
चमक  है ,ताज़ा है ,गतिशील है,
तब  तक ,
संवेदना  है ,आकर्षण है ,
वेदना लिए  आक्रोश  है,
फूटने  को ,
ज्वालामुखी  की  तरह ........./
कुछ देर बाद स्याह हो जायेगासूख कर ,
चढ़ने  लगेगी  पर्त,
धुल की , धुधला  हो  जायेगा ,
स्वरुप ,
धुधली  पड़  जाएगी  इबारत ,
जो  लिखी   ....../
उस  याददाश्त   की  तरह
जो  पुरानी  हो  गयी ,
टांग  दी  जाती  है ,
दीवाल  की  खूंटी  पर,
यादकर  लेते  हैं , कैलेण्डर में लिखी ,
तारीख  की  तरह ........./
औचित्य  क्या  है  अब ,
अंतर  करने  का ,
शहीद और  गद्दार के ,
खून  का,
अमृत और  विष  का ,
पुनरावलोकन
 का......../



17 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kumar ने कहा…

औचित्य क्या है अब ,
अंतर करने का ,
शहीद और गद्दार के ,
खून का,
अमृतऔर विष का ,
पुनरावलोकन
का......../

बहुत ही सार्थक प्रश्न उठाया है आपने,उदय जी.
सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Deepak Saini ने कहा…

जो पुरानी हो गयी ,
टांग दी जाती है ,
दीवाल की खूंटी पर,
यादकर लेते हैं ,कैलेण्डर में लिखी ,
तारीख की तरह ........./


अति सुन्दर चित्रण
बहुत बहुत बधाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 03-09 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

विचारणीय ... अच्छी प्रस्तुति

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही सुंदर कविता बधाई |आपका ब्लॉग हमने अपनी सूची में लिंक कर दिया है |

Kailash C Sharma ने कहा…

औचित्य क्या है अब ,
अंतर करने का ,
शहीद और गद्दार के ,
खून का,
अमृत और विष का ,
पुनरावलोकन
का......../

....बहुत सारगर्भित और विचारणीय प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

Ojaswi Kaushal ने कहा…

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Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

सोचने पर मजबूर करती..एक बढ़िया प्रस्तुति

ZEAL ने कहा…

यथार्थ को चित्रित करती उम्दा अभिव्यक्ति।

Maheshwari kaneri ने कहा…

औचित्य क्या है अब ,
अंतर करने का ,
शहीद और गद्दार के ,
खून का,
अमृतऔर विष का ,
पुनरावलोकन....सार्थक चिन्तन..सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.उदय जी.

डॉ. हरदीप कौर सन्धु ने कहा…

उदय जी,
बढ़िया प्रस्तुति !
बहुत ही सुंदर कविता
बधाई!

Rakesh Kumar ने कहा…

नई पुरानी हलचल से एक बार फिर से यहाँ.

दिल पुकारे आपको
मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा'
पर वहाँ.

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही बढि़या ।

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut umda prastuti.aabhar.

Amrita Tanmay ने कहा…

बढ़िया लिखा है.शुभकामना...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

विचार परक लेखन....
उत्तम रचना...
सादर...