रविवार, 23 अक्तूबर 2011

देश -दिवाली

कल थी होली, आज दिवाली ,
कल    की    बात  सवाली  है -
फीके   रंग ,  बुझे  से    दिये ,
रात    अमावस     वाली    है -
*
बोये  दीप,   उगेगा     सूरज ,
चहुँ  ओर प्रकाश छा जायेगा -
रोशन   होगा   हर    आँगन ,
हर पथ, प्रकाश  पा  जायेगा -
*
आस प्रतीक्षित  ढूंढ़  रही  है  ,
रात   काली   की   काली  है -   
*
दांव    लगाये      हार     गए ,
जो   थी   वो    भी   दूर  गयी -
धोया ,पोंछा, घर,  हर, कोना ,
पर   मेरा  घर  वो  भूल गयी -
*
कब आयी  दीनों  के  आसन ,
उल्लू  , संग  रहने   वाली  है -
*
मिटटी   ,तेल  , रुई ,    रोली ,
जा छिपे  कहीं  अस्ताचल में -
सामर्थ्य   कहाँ  की दीप जले
जलते    हैं   तो    ख्वाबों   में -
*
जलता  ह्रदय, बुझते हैं दीये,
कैसे      रीत     निराली    है -
*
अपना आँगन ,देश ,दिवाली ,
हर  द्वार   सजे   रोशन होता -
वाह !  दिवाली   कंठ,    कंठ ,
न  शोक   कहीं  क्रंदन  होता -
*
कर दे निरस्त वीसा  अपना ,
अंक  ,स्वदेस   का  खाली  है -
*
                        उदय वीर सिंह .
                         २३/१०/२०११







14 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

कितनी सही बात कही है।

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

waah! kitni saarthak aur upyogi baat. Badhai

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत प्यारी रचना है ...बधाई !
दीपावली की मंगल कामनायें स्वीकार करें !

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रविष्टि कल दिनांक 24-10-2011 के सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

रविकर ने कहा…

शुभकामनाएं ||

रचो रंगोली लाभ-शुभ, जले दिवाली दीप |
माँ लक्ष्मी का आगमन, घर-आँगन रख लीप ||
घर-आँगन रख लीप, करो स्वागत तैयारी |
लेखक-कवि मजदूर, कृषक, नौकर व्यापारी |
नहीं खेलना ताश, नशे की छोडो टोली |
दो बच्चों का साथ, रचो मिलकर रंगोली ||

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..

संगीता पुरी ने कहा…

सार्थक प्रस्‍तुति ..
सपरिवार आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

हृदयस्पर्शी रचना उदयवीर जी! मैं खुद कितनी बार इन परिस्थितियों से दो-चार हुआ हूँ लेकिन फिर, ज़िन्दगी समझौतों का खेल ही तो है!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव.... गहनाभिव्यक्ति...
आपको दीप पर्व की सपरिवार सादर शुभकामनाएं

ZEAL ने कहा…

दांव लगाये हार गए ,
जो थी वो भी दूर गयी -
धोया ,पोंछा, घर, हर, कोना ,
पर मेरा घर वो भूल गयी ...

very touching lines...

.

चन्दन..... ने कहा…

बहुत ही सही बात कही|
बहुत ही सुन्दर रचना|

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!
chandankrpgcil.blogspot.com
ekhidhun.blogspot.com
dilkejajbat.blogspot.com
पर कभी आइयेगा| मार्गदर्शन की अपेक्षा है|

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सुंदर भावाभिव्‍यक्ति.
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना...दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

सागर ने कहा…

bhaut khubsurat... happy diwali...