शुक्रवार, 11 मई 2012

दिनकर

हो  अरुणोदय ,सुप्रभात  यश -गान 
 सतत         तुम्हारा          दिनकर -

खिले पुष्प गुच्छ ,तरुनाई  कोपल मांगे 
खग -बृंद  सहज आनंद, मधुरतम मांगे
ताम्र वर्ण, नव , नभ - प्रभा  आलोकित ,
क्षितिज   सरल,   सहज   आँगन   मांगे -


तुषार   जड़ित  , हर    कुसुम    पात,
किसलय में धमक तुम्हारा दिनकर-


शुभ्र , रश्मियों   के  डेरे , फैलाये  बांह ,
साधक   , सिद्ध, शैव आराधन    मांगे-
मिटे    कलुष , पाप , उद्वीप्त   हृदय  हो ,
सर्व- जन सुखाय,समृद्धि का वर मांगे -


उर्जा-  नवल , नव  - शक्ति   -  पुंज ,
निधि  उपहार -तुम्हारा    दिनकर-

जले  तम , उर  का , विकसित   हो ,
चेतना ,यश ,अर्जन ,सुखद  जीवन -
वैर ,  नैराश्य  ,  प्रतिकार,    हीनता
हो  विलुप्त , निष्पाप   बने  अंतर्मन -


प्रतीक्षारत   कोष  ,   किरण   देखे,
हृदय से आभार,तुम्हारा   दिनकर-


जल, थल, व्योम , दिग  - दिगंत ,
सुर, नर  , असुर , यक्ष   , गन्धर्व  -
चराचर,मूर्त,अमूर्त ,पुरा - नूतन ,
संचार बिन अपूर्ण ,जीवन  वैभव -


निर्विघ्न   गमन ,  निर्वात   ,वात,
सृजन- सृष्टि काहस्ताक्षर दिनकर-


अर्पित,अर्घ, पयोधि  विनीत ,नित 
मंगल   गान    तुम्हारा     दिनकर -

                                                  उदय वीर सिंह  

8 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

जले तम , उर का , विकसित हो ,
चेतना ,यश ,अर्जन ,सुखद जीवन -
वैर , नैराश्य , प्रतिकार, हीनता
हो विलुप्त , निष्पाप बने अंतर्मन -

सुंदर अति सुंदर रचना ,......

MY RECENT POST.....काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शब्दों की प्रकाशमयी थिरकन सी रचना।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति |
शुभकामनाएं ||

Shanti Garg ने कहा…

बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर-सुन्दर शब्दों से सुसज्जित बेहद प्रभावशाली रचना....शुभकामनाएं ||

रचना दीक्षित ने कहा…

शब्दों के अभिनव प्रयोगों से कविता ओजपूर्ण है भावपूर्ण है.

बहुत सुंदर प्रस्तुति.

Kailash Sharma ने कहा…

बेहतरीन भावाभिव्यक्ति....शब्दों का सुन्दर संयोजन..