सोमवार, 14 मई 2012

वो आया था

वो आता है  ,
बेल बजाता है ,
मुझे देख हकलाता है 
बाबूजी ! मैडम ...
तरन को देख सिर  झुकाता है 
कुछ दे दीजिये 
हाथ फैलाता है ,
पत्नी पूछती  है 
फिर भाग आये आनाथालय से ?
जी नहीं ,
बाप उठा लाया ,
लगा दिया  हलवाई की  दुकान पर 
अंगुलियाँ गल गयीं 
काम से हटा दिया ,
अब  क्या  करूँ ? 
बड़ी  बहन  थी  सन्नो
कल  बाप  ने  बेच  दिया
खूब  रोई  वो ,  मैं  भी  ....
बोली  थी  मैडम  को  बताना .../
बाप  ने  मारा ,
मना किया  ..
कल  नयी  माँ  आएगी ..
किससे  नाता  जोडूं ?
भाग्य  से  ,बाप  से  ...या  मौत  से
माँ  की  याद आती  है
आता  हूँ  ,
आप  में  माँ , पाता  हूँ
शायद  आप  नाराज  हैं ,
मैं  माँ  को  भी , भूल  जाना  चाहता  हूँ
कल  दूर  बहुत  दूर
माँ  के  पास
जाना  चाहता  हूँ  ....
खाली हाथ ही था ,
कुछ दे पाते कि
टूर गया......
हम दोनों देखते रहे ....
नहीं  आएगा ,
जो  आता  रहा  .......


                          उदय वीर सिंह
                            14-05-2012






 


    

8 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

मार्मिक-
दर्द ही दर्द |
सशक्त प्रस्तुति भाई जी |
सादर ||

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

किस पीड़ा में सिमट जाये वह..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी मार्मिक प्रस्तुति!

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर दर्द भरी सशक्त रचना,..अच्छी प्रस्तुति

MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,

Anupama Tripathi ने कहा…

विषम परिस्थितियां ...
मार्मिक रचना ...!!

शुभकामनायें .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मार्मिक प्रस्तुति

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

mahendra verma ने कहा…

समाज में ऐसे बच्चे भी हैं जिनका कोई नहीं।
मार्मिक कविता।