मंगलवार, 24 जुलाई 2012

हमारी बेटियां


  हमारी बेटियां-     मित्रों ! मेरे  हृदय के  उद्ग़ार  मेरी बेटियों  के लिए ,मुक्तक  के  रूप में मेरी शीघ्र प्रकशित होने वाली  पुस्तक "तनया " से -
***
आग        हैं     पानी    हैं
हमारी                बेटियां
जौहर     हैं,   समाधि  हैं
हमारी                बेटियां,


यज्ञ       हैं ,    समिधा  है,
आहुति    व    संकल्प  हैं
संसकारों  की  पुरस्कार 
हैं,    हमारी         बेटियां,

                                                    
                                               चित्र -{साभार पंजाबी टरबन  से ]
 गीत       हैं ,    संगीत   हैं,         
लय,  ताल  की  प्रबुद्धता,
सरस्वती   का   प्यार हैं                           
हमारी                बेटियां,


शौर्य     हैं ,  शमशीर   हैं ,
रणभूमि की  पहचान हैं ,
दुर्गा       की     हुँकार   हैं.
हमारी                बेटियां ,


सहजता   ,    सम्पूर्णता
सागर      की   गंभीरता
दुर्दिन    में   भी अटूट हैं
हमारी                बेटियां-


छोड़ा   जिसे   ज़माने ने ,
वे     छोड़     न     सकी ,
स्नेह    की   प्रतिमुर्तियां,
हमारी              बेटियां,


लिख    रही   हैं  भाव से,
सम्भाव    व     संवेदना,
हर   दर्द  में , हमदर्द   हैं,
हमारी               बेटियां-


करता       रहा     सवाल
जमाना       भी    गौर से,
हर  प्रश्न     का   जबाब हैं
हमारी                 बेटियां-


जब   बंद   होती    चौखटें ,
मुंह मोड़ कर स्वजन चले ,
उस  वक्त   की   आधार हैं ,
हमारी                  बेटियां -


गंगा     है       जमुना    हैं ,
सरस्वती  ,   चिनाब    हैं,
मंगल   ,मलय   समीर हैं,
हमारी                 बेटियां-


छोड़ा   जिसे   ज़माने ने ,
वे     छोड़      न      सकी ,
स्नेह    की  प्रति-मूर्तियां,
हमारी                बेटियां,


लिख     रही   हैं  भाव से,
सम्भाव     व     संवेदना,
हर   दर्द   में , हमदर्द   हैं,
हमारी                 बेटियां-


करता       रहा     सवाल
जमाना       भी    गौर से,
हर  प्रश्न     का   जबाब हैं
हमारी                 बेटियां-


जब    बंद   होती    चौखटें ,
मुंह मोड़ कर स्वजन चले ,
उस   वक्त   की   आधार हैं ,
हमारी                   बेटियां -


गंगा     है       जमुना    हैं ,
सरस्वती   ,   चिनाब   हैं,
मंगल  , मलय   समीर हैं,
हमारी                 बेटियां-


हर  दौर   की   हैं  रोशनी ,
जब  गाफिल   कभी  हुई
जलती    हुई   मशाल  हैं,
हमारी                 बेटियां-


जौहर       मना      लिया ,
नतमस्तक    नहीं   हुयीं  ,
आग    की   सेज   सोई हैं 
हमारी                 बेटियां-


                                      उदय वीर सिंह 
                                         24/07/2012




       




       

     ,

20 टिप्‍पणियां:

expression ने कहा…

बहुत सुन्दर...
जब बंद होती चौखटें ,
मुंह मोड़ कर स्वजन चले ,
उस वक्त की आधार हैं ,
हमारी बेटियां -

नमन आपकी लेखनी को..(एक बेटी होने के नाते गर्वान्वित हूँ इसे पढ़ कर.)
आभार ह्रदय से.

अनु

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हमारा गर्व हैं हमारी बेटियाँ..

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

अर्शिया अली ने कहा…

बहुत सुंदर रचना। बधाई।

............
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चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर!!

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत सुंदर सशक्त भाव और अभिव्यक्ति भी ...!!
शुभकामनायें...!!

शिवनाथ कुमार ने कहा…

बहुत खूब ...
बेटियों के अंतर्मन में झांकती, उनकी त्याग और समर्पण से सजी सुंदर सी रचना ..
साभार !

vandana ने कहा…

सहजता , सम्पूर्णता
सागर की गंभीरता
दुर्दिन में भी अटूट हैं

जब बंद होती चौखटें ,
मुंह मोड़ कर स्वजन चले ,
उस वक्त की आधार हैं ,
हमारी बेटियां -

बहुत सुन्दर प्रतीकों से सम्मान दिया आपने बेटियों को हार्दिक आभार

Suresh kumar ने कहा…

Bahut hi khubsurat rachna..

veerubhai ने कहा…

छोड़ा जिसे ज़माने ने ,
वे छोड़ न सकी ,
स्नेह की प्रतिमुर्तियां,
हमारी बेटियां,

भाई साहब इतनी बढ़िया रचना में वर्तनी की अशुद्धियाँ खटकतीं हैं कृपया -प्रति -मूर्ती कर लें.कृपया यहाँ भी पधारें -
बुधवार, 25 जुलाई 2012
बढती उम्र का असर न पड़े बीनाई (विजन )पर
बढती उम्र का असर न पड़े बीनाई (विजन )पर
http://veerubhai1947.blogspot.de/तथा यहाँ भी -
रविवार, 22 जुलाई 2012
जिसने लास वेगास नहीं देखा
अमरीका नहीं देखा उसने जिसने लास वेगास नहीं देखा
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शनिवार, 21 जुलाई 2012
गोरों का पूडल प्रेम
गोरों का पूडल प्रेम
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डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

लिख रही हैं भाव से,
सम्भाव व संवेदना,
हर दर्द में , हमदर्द हैं,
हमारी बेटियां-

अति सुंदर पंक्तियाँ ....मन को छूती रचना

सुशील ने कहा…

बहुत खूबसूरती से
सब बता गये आप
क्या क्या नहीं हैं
हमारी बेटियाँ
सब भी हैं और
सब कुछ भी हैं
हमारी बेटियाँ !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सटीक...!
हर दौर की हैं रोशनी ,
जब गाफिल कभी हुई
जलती हुई मशाल हैं,
हमारी बेटियां-


जौहर मना लिया ,
नतमस्तक नहीं हुयीं ,
आग की सेज सोई हैं
हमारी बेटियां-

सदा ने कहा…

वाह ... प्रत्‍येक शब्‍द मन का संकल्‍प है बेटियां दिल की उमंग हैं बेटियां

अरुन शर्मा ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर सटीक रचना

Rajesh Kumari ने कहा…

अति सुन्दर श्रेष्ठ भाव ,शानदार शब्दों में बेटी कि महिमा को दर्शाती प्रस्तुति बेटियाँ ही हमारा गौरव है एक दो पद्य रिपीट हो रहे हैं ठीक कर लें

dheerendra ने कहा…

बेटियाँ समाज का दर्पण है,,,,
बहुत सुंदर सशक्त भाव लिए बेहतरीन प्रस्तुति,,,,,

RECENT POST काव्यान्जलि ...: आदर्शवादी नेता,

udaya veer singh ने कहा…

आदरणीय राजकुमारी जी! विनम्रता के साथ ,आपके ध्यानाकर्षण का आभार जी . जहाँ तक मेरे संज्ञान में आये शब्द यथा ,समाधि, समिधा ,सरश्वती ,अपने आप में विभिन्न शब्द व अर्थ लिए हैं / समिधा = यज्ञ की लकड़ियाँ ,सरश्वती= देवी ,सरश्वती= नदी ]पुस्तक " तनया" में इस तरह के शब्दों की बहुतायतता है /अगर कही त्रुटियाँ हैं तो त्रुटिहीन करने का प्रयास करूँगा जी , बहुत -आभार जी ......./

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

वाह ...नमन आपकी इस सोच को

बेनामी ने कहा…

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