रविवार, 7 अक्तूबर 2012

खरा सौदागर


सुनता  ,
हृदय की पीर ,
याचना,करुण- क्रंदन 
विवसता ,संताप  ,
अभिशप्त जीवन-गाथा ,
वो शब्दकोष जो गढ़े गए  ,
निहितार्थ दमन ,षडयंत्र ,मर्दन के ..
फूंकता प्राण !
दिशाहीन, विक्षिप्त -जीवन ,
मनुष्यता की क्षत-विक्षत शरीरमें 
दे संवेदना आत्मबल ,
भरता हुकार ! 
तोड़ बंध,पाखंड ,अन्याय जुल्म का ..
ले ज्ञान का खंजर ,
ध्वस्त करता,
पाशविक परंपरा ,
झूठे दंभ ,अभिमान को ..../
लिए प्रज्ञा का यशस्वी आसमान,
अंशुमान ! 
कभी - कभी ,
गुरु नानक 
आता है ....
      
             -    उदय वीर सिंह   

7 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सबको जीवन का मोल बता गये जो।

रविकर ने कहा…

गुरुवर को सादर नमन ||

Manu Tyagi ने कहा…

वाकई , सुंदर रचना

वन्दना ने कहा…

कभी - कभी ,
गुरु नानक
आता है ....

रचना दीक्षित ने कहा…

शिक्षाप्रद और उत्साहवर्धक प्रस्तुति.

बधाई.

Dheerendra singh Bhadauriya ने कहा…

तोड़ बंध,पाखंड ,अन्याय जुल्म का ../
ले ज्ञान का खंजर ,
ध्वस्त करता,
पाशविक परंपरा ,
झूठे दंभ ,अभिमान को ..../

उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकारें,,,,,

RECENT POST: तेरी फितरत के लोग,

रविकर ने कहा…

गाफिल जी अति व्यस्त हैं, हमको गए बताय ।

उत्तम रचना देख के, चर्चा मंच ले आय ।