शनिवार, 15 दिसंबर 2012

हम पर फ़िदा है



हम पर फ़िदा है सदा -ए- मोहब्बत 
की  है   इबादत   हम   करते  रहेंगे- 

हवाओं के आंचल लिखी दास्तान है
हमने  लिखा  है ,फिर  भी   लिखेंगे -

बरक -ए-मोहब्बत किताबें  बनेंगीं ,
पढ़ा   हर   किसी   ने हम  भी पढेंगें -

इस पार  तुम हो, मोहब्बत है  मेरी,
उस पर क्या है नहीं हमको मालूम -

मौजों   के  ऊपर  लिखे  फलसफे हैं
लिखा    है  रब  ने  हम  पढ़ते रहेंगें-

निगाहों में क्या है जो देखो तो जानों ,
तुम्ही तुम बसे हो बयां अक्स करते -

फूलों   के  हाथों   में  मेहदी  रची  है
उन फूलों को आंचल में  भरते रहेंगे -




                    - उदय वीर सिंह

9 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हिल मिल जुल कर जश्न मन रहा,
कुदरत का श्रंगार सज रहा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

मित्रों!
13 दिसम्बर से 16 दिसम्बर तक देहरादून में प्रवास पर हूँ!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (16-12-2012) के चर्चा मंच (भारत बहुत महान) पर भी होगी!
सूचनार्थ!

सदा ने कहा…

निगाहों में क्या है जो देखो तो जानों ,
तुम्ही तुम बसे हो बयां अक्स करते -

फूलों के हाथों में मेहदी रची है
उन फूलों को आंचल में भरते रहेंगे -
वाह ... बहुत ही बढिया।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा प्रस्तुति ,,,, बधाई।

recent post हमको रखवालो ने लूटा

haiku lok ने कहा…

फूलों के हाथों में मेहदी रची है
उन फूलों को आंचल में भरते रहेंगे -

बहुत अच्छी रचना है .....इन शब्दों से कुछ ऐसा भी बयाँ किया जा सकता है
फूलों के हाथों
खूब मेहदी रची
खिला आँचल

हरदीप

madhu singh ने कहा…

बेहरतरीन ग़ज़ल निगाहों में क्या है जो देखो तो जानों ,
तुम्ही तुम बसे हो बयां अक्स करते -

फूलों के हाथों में मेहदी रची है
उन फूलों को आंचल में भरते रहेंगे -

Neetu Singhal ने कहा…

स्याहे- रौशन सुबहो एक कलाम लिख गई..,
शोख अबरू के दरम्याँ शफक शाम लिख गई.....

रश्मि ने कहा…

वाह...