गुरुवार, 31 जनवरी 2013

मुझे दवा देगा-

हमकदम !
फ़सानों ने दी है  इतनी  शोहरत ,
कि चाहता हूँ कुछ बाँट दूँ तुमको......
 
मुझे दवा देगा-
***
दर्द      मेरा  ,   मुझे     दवा    देगा
दरम्यां   शोलों     के    हवा    देगा-

हांथों  पे  ईमारत, खड़ी  नहीं  होती  ,

हाथों  से   ताजमहल    बना   देगा-

दिल  में  क्या छिपा हुआ  है  मंजर

वक्त     आने     पर ,   बता     देगा-

तूफां  के  काफिलों से  बेखबर नहीं

आशियाना   समंदर  को बना लेगा -

पास जिसके दिल  नहीं, दौलत रही

वो   गरीब   किसी   को   क्या  देगा-

मेरे रोने  की  अदा  तुम्हें  हंसाएंगी,

मत आना पास मेरे तुम्हें रुला देगा-

                                 - उदय  वीर सिंह  

                     


4 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

मेरे रोने की अदा तुम्हें हंसाएंगी,
मत आना पास मेरे तुम्हें रुला देगा-,,,,,

बहुत उम्दा गजल,,,भाई जी,,बधाई

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चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह! क्या बात है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

छोटी बहर की सुन्दर ग़ज़ल!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दर्द मेरा , मुझे दवा देगा
दरम्यां शोलों के हवा देगा-

दमदार..