रविवार, 13 जनवरी 2013

अब धियाँ दी लोड़ी .....|



अब धियाँ  दी लोड़ी .....|

लोड़ी [लोहड़ी]  की  मेरे हमवतन ,
हमदर्दों को लख - लख बधाईयाँ जी !
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खुशियों  की  रंगत  कभी  कम  न हो 
कुछ हम गाते हैं ,कुछ  सुनाओ  मुझे ,
मेरी समिधा,तुम्हारी भी मिल के जले 
हर  बला  कह  उठे  कि  जलाओ मुझे-
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रंग  लोई   का  फीका  नहीं, सुर्ख  हो,
हर मुकद्दर का दर पाए  इतनी ख़ुशी 
बेटी   मांगती   है   लोड़ी   में   बलैयाँ    
भैया  की   ख़ुशी  में  है  अपनी  ख़ुशी-

हसरत  में  उसकी कहीं कुछ छिपा है 
कुछ  हमसे  सुनो  कुछ  बताओ मुझे -

नवाजा  है जिसने  सिर पर ताज  को ,
हर   नजर  से बचाने   का हरकारा  है 
गाली   में   मुहब्बत    की   चासनी है ,
वीर का  देखा  दुःख तो जीवन वारा है 

युगों   तक   रहे  चंबा  लोड़ी   दा माये  
अब   धियाँ   दी   लोड़ी  जलाओ  कदे- 

                                    - उदय वीर सिंह 

9 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवार के चर्चा मंच पर ।। मंगल मंगल मकरसंक्रांति ।।

ANULATA RAJ NAIR ने कहा…

प्यारी अभिव्यक्ति...
लोहड़ी की लख लख बधाईयाँ...
सादर
अनु

संध्या शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ...लोहिड़ी व मकर संक्रांति पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
मकर संक्रान्ति के अवसर पर
उत्तरायणी की बहुत-बहुत बधाई!

रचना दीक्षित ने कहा…

युगों तक रहे चंबा लोड़ी दा माये
अब धियाँ दी लोड़ी जलाओ कदे-

बाहर सुंदर पेशकश इस लोहड़ी पर.

लोहड़ी, पोंगल, मकर संक्रांति और बिहू की बधाइयाँ.

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

बढ़िया रचना!
लोहड़ी दी लख-लख वधाइयाँ!:)

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

बढ़िया रचना!
लोहड़ी दी लख-लख वधाइयाँ!:)

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

लोहड़ी की ढेरों बधाइयाँ आपको..

Asha Lata Saxena ने कहा…

मनभावन अभिव्यक्ति |मकर संक्रांति पर हार्दिक शुभकामनाएं |
आशा