गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

बसंत की रस-धार सुन्दर


प्रिय मित्रों! व्यस्तताओं में आपसे रूबरू न होने का अफसोस ,अपनी पीड़ा अपना सुख आपसे न कह सका ,कारन छठवां अन्तराष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन [दुबई ] में प्रतिभागिता | संस्मरण बाद में आप तक पहुंचाएंगे , पुनः आपसे संवाद पूर्ववत कायम रहे आपके स्नेह के साथ  ....|






बसंत की रस-धार सुन्दर 

संसार    का    निर्माण  सुन्दर,
मनुष्यता    का    गान  सुन्दर 
प्रेम    का    आरंम्भ     सुन्दर
प्रेम    का    अवसान    सुन्दर..|

गीत   का   लय   ताल  सुन्दर
बह  चले  हृदय  के स्वर्ण- वन
आतिशी   हो    पुष्प   की  नभ
जाये  शोक आये  बसंत सुन्दर ... |

प्रकृत    सुधा  -  रस    सींचती 
जड़-चेतन की मुस्कान सुन्दर      
बरस    रही    अगाध   नविका
कली कोपल का वितान सुन्दर....|

तज  मालिन्य ,नव  पात  सम
नव सृजन की कर बात सुन्दर 
प्रमाद विस्मृत,सद्दभाव जाग्रत 
बंसरी  बसंत  की  गान सुन्दर.... | 
                      
स्नेह     सरिता    मृदुभाव   की 
खोलती  आँचल,  प्रवाह  सुन्दर
आ रे मन  बावरे, होले मज्जित 
बसंत   की    रस -  धार  सुन्दर ....|

                    उदय वीर सिंह   
                      
                    

       

3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्वागत हे आगत बसन्त..

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

[दुबई ]प्रतिभागिता संस्मरण के इन्तजार में,,,

प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो ये मधुमास आ गया!
विदा हुआ हेमंत आज पर सबमें बसंती रंग छा गया!


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संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर ....