बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

आँखें उनकी सपने मेरे -




Photo: आँखें उनकी सपने मेरे -
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दरमियाँ दोस्ती के दुश्मनी भी साथ आई 
हम  तो  हाथों   में  गुलाब  लिए  बैठे  थे 
मुरादें प्यार की थीं ,सुपारी  साथ  आयी-

मुक्तसर न हुयी ज़माने की संगदिली यारा 
बेदर्द  देता  गया, हम  लेते  गए  खामोश 
अफ़सोस हम नहीं रहे तब मेरी याद आयी- 

फेहरिस्त  लम्बी   बनी   मेरे  गुनाहों  की
मुझे उज्र  नहीं था सिर्फ  एक को छोड़ कर ,
जो जिंदगी मेरी नहीं, मेरे साथ क्यों आयी - 

                                  - उदय वीर सिंह





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दरमियाँ दोस्ती के दुश्मनी भी साथ आई

हम तो हाथों में गुलाब लिए बैठे थे


मुरादें प्यार की थीं ,सुपारी साथ आयी-



मुक्तसर न हुयी ज़माने की संगदिली यारा 


बेदर्द देता गया, हम लेते गए खामोश

अफ़सोस हम नहीं रहे तब मेरी याद आयी-


***फेहरिस्त लम्बी बनी मेरे गुनाहों की


मुझे उज्र नहीं था सिर्फ एक को छोड़ कर

 ,
जो जिंदगी मेरी नहीं, मेरे साथ क्यों आयी -



                                         - उदय वीर सिंह

5 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

Sir, Namaskar itni pyari rachna aur usme itni gahari jhakjhor denewali udaasi? Yahi jeewan hai aur iske roop nirale hai.. kshan-kshan pariwartansheel..... aur yahi sach bhi hai ..abhar ''

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब, प्रभावी

Kailash Sharma ने कहा…

फेहरिस्त लम्बी बनी मेरे गुनाहों की
मुझे उज्र नहीं था सिर्फ एक को छोड़ कर ,
जो जिंदगी मेरी नहीं, मेरे साथ क्यों आयी -

...बहुत सुन्दर दिल को छूती अभिव्यक्ति...