शुक्रवार, 19 जुलाई 2013













 जिंदगी    तू    नए   सवाल  देना
मिल   सकें  उनके   जबाब  देना
ढूंढ़ने   को  ताउम्र   मकसद कोई
रास्ते          लाजवाब          देना-
**
यूँ   तो   हर  तरफ  नागफनी  ही
उगे        दिखाई         पड़ते     हैं,
खुरदरी   जमीन    में    ही   कहीं
खिलता     हुआ     गुलाब     देना-
***
कोई    दिलचस्प    आईना    जो
दिल     से      बात     करता   हो
झूठे  रिश्तों   की    फेहरिस्त  में
एक     सच्चा     ख्वाब        देना-
***
उतर    जाना     मेरी    मुडेर    पर
आहिस्ता    शबनमीं     दबे    पांव,
शोर बहुत  है  गली में नक्कारों का
फिर  भी मुझे हौले से  आवाज देना -

                      -  उदय वीर सिंह

 


7 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जीवन से है चाह अनोखी,
क्या लाये, सीमित सा तन मन।

रविकर ने कहा…

बढ़िया है आदरणीय-

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत भावपूर्ण ...उत्तम रचना ...!!कई बार पढ़ी ....
शुभकामनायें ....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत खयाल

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बेहतरीन रचना....

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर, अच्छी रचना
बहुत सुंदर



मेरी कोशिश होती है कि टीवी की दुनिया की असल तस्वीर आपके सामने रहे। मेरे ब्लाग TV स्टेशन पर जरूर पढिए।
MEDIA : अब तो हद हो गई !
http://tvstationlive.blogspot.in/2013/07/media.html#comment-form

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा,सुंदर सृजन,,,

RECENT POST : अभी भी आशा है,