रविवार, 6 अक्तूबर 2013

आंचल खरीद लेते- -

  1. आंचल खरीद लेते-
    -
    बिकते अगर जो बादल
    बारिश खरीद लेते -
    बिकती अगर जो आँखें
    काजल खरीद लेते-
    शहर से लेकर गाँव
    करता रहा तलाश
    मिल जाते प्रेम के पांव
    पायल खरीद लेते -
    पीना शराब छोड़ उदय
    कुछ पैसे बचाया कर
    ढकने को किसी की आबरू
    आंचल खरीद लेते-
    रहा प्यास का रकीबपन
    होठों से कभी नहीं
    जो बिकतीं अगर घटायें
    सावन खरीद लेते -

    - उदय वीर सिंह


    Photo: आंचल खरीद लेते- 
-
बिकते अगर जो बादल 
बारिश खरीद लेते -
बिकती अगर जो आँखें 
काजल खरीद लेते-
शहर से लेकर गाँव 
करता रहा तलाश 
मिल जाते प्रेम के पांव 
पायल खरीद लेते -
पीना शराब छोड़ उदय 
कुछ पैसे बचाया कर  
ढकने को किसी की आबरू 
आंचल खरीद लेते- 
रहा प्यास का रकीबपन
होठों से कभी नहीं 
जो बिकतीं अगर घटायें 
सावन खरीद लेते -

               उड़ी वीर सिंह .

4 टिप्‍पणियां:

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - सोमवार - 07/10/2013 को
अब देश में न आना तुम गाधी
- हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः31
पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत ख़ूब! नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

कालीपद प्रसाद ने कहा…

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं


latest post: कुछ एह्सासें !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दमदार अभिव्यक्ति, शुभकामनायें।