रविवार, 13 अक्तूबर 2013

किसे जिंदगी की.....

किसे  जिंदगी  की.....
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किसे   जिंदगी  की  जरुरत  नहीं  है 
किसने    कहा    खुबसूरत   नहीं  है -
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हमने माना उदय हादसा जिंदगी है 
ये रुखसत कब होगी मुहूरत नहीं है -
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ज़माने  ने  कब इसकी तारीफ की है
ख़ुशी कम इसे ज्यादा तकलीफ दी है -
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देखो जहाँ जिंदगी जिंदगी जिंदगी है
प्यार में सिर्फ है, आतिशी  में नहीं है -
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फूल काँटों का दामन सांझी जिंदगी है 
जिंदगी एक सफीना हुकूमत नहीं है -
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धूप  में  छाँव  में हर शहर-गाँव में  है 
 लगाओगे  क्या  इसकी  कीमत नहीं है -
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                                        उदय वीर सिंह                  


   

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (13-10-2013) आँचल में है दूध : चर्चा मंच -1397 में "मयंक का कोना" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

बेनामी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
और हमारी तरफ से दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें

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प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ा सच कहा है।