बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

उनको नजर आने दे -

उनको नजर आने दे -
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सहरा  में  सावन , बरस  जाने  दे-
पीर पर्वत सी होई पिघल जाने दे -

गुलजार  गुलशन  तो  होगा उदय

दर से तूफान को, तू गुजर जाने दे -

कैसे  टूटी  कसम ,पूछ  लेंगे वजह

अपने कूचे में उनको नजर आने दे -

दीप बुझता है घर का तो बुझ जाने दे

रास्ते में मुसाफिर के जल जाने दे -

पत्थरों की तरह कोई जीना भी क्या

बनके जर्रा  हवा संग बिखर जाने दे -

                                       -  उदय वीर सिंह


4 टिप्‍पणियां:

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 17-10-2013 को
चर्चा मंच
पर है ।
कृपया पधारें
आभार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वाह, बहुत खूब।

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : लुंगगोम : रहस्यमयी तिब्बती साधना

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत और प्यारी रचना..... भावो का सुन्दर समायोजन......