शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2013

संग तराशोगे-

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मूरत  निकल के आएगी 
जो संग तराशोगे-

आएगी दर मुकद्दर
अगर पता दोगे-

मुस्कराएगी ख़ुशी  तुमसे 
जब मुस्करा दोगे -

दिखेगा वो जो दिखा नहीं अब तक 
पर्दा जब उठा दोगे -

गुजर जाएगी गमें शाम पल में 
कोई गीत गुनगुना दोगे-

प्यार दिल में संजोये रखना 
मांगेगा कोई तो क्या दोगे -

                    उदय वीर सिंह . 

4 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

प्यार दिल में संजोये रखना
मांगेगा कोई तो क्या दोगे -

बहुत सुंदर प्रस्तुति.!

RECENT POST : पाँच दोहे,

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (05-10-2013) को "माता का आशीष" (चर्चा मंच-1389) पर भी होगी!
शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

आशा जोगळेकर ने कहा…

दिखेगा वो जो दिखा नहीं अब तक
पर्दा जब उठा दोगे -

गुजर जाएगी गमें शाम पल में
कोई गीत गुनगुना दोगे-

बहुत सुंदर।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना