रविवार, 3 नवंबर 2013

डालर की तरफ-


दिल  में  नफ़रत  हाथ  में  सपोला है 
मोहब्बत  भी  है तिजारत  की तरफ -  

वक्त     कुछ    बदला  बदला  सा  है 
आ  रही   है  गेंद  बालर  की  तरफ -

पाउंड  की  अब  लालसा है ह्रदय में
रूपया  छोड़   हाथ  डालर की तरफ-

सन्देश में है फूल  की  जगह  खंजर 
वन्दगी छोड़ ,हाथ कालर की तरफ-

गीत  नहीं  शोकगीतों की  आमद है,   
कान खड़े  हैं , हर  आहट  की तरफ - 

अंदर  बार सजे हैं  नाजनी की तरह
पेट  का  सवाल है ,बाहर   की तरफ -

हर्फ़  किताबों के कुछ मायने कुछ और 
शायद हो गए हम राहे-कायर की तरफ - 

                                  - उदय वीर सिंह .
  


  

5 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |
सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |
जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||

वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी
पावली=चवन्नी

गावदी = मूर्ख / अबोध

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह! क्या बात है! फिर आई दीवाली
आपको दीपावली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।
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प्रकाशोत्सव के महापर्व दीपादली की हार्दिक शुभकानाएँ।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाए...!
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RECENT POST -: दीप जलायें .

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (04-11-2013) महापर्व दीपावली की गुज़ारिश : चर्चामंच 1419 "मयंक का कोना" पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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दीपावली के पंचपर्वों की शृंखला में
अन्नकूट (गोवर्धन-पूजा) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'