गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

जो देना तो प्यार मुझे .....

क्या   मांगू   दाते   तुमसे 
जो  देना  तो   प्यार  मुझे ,
जर्रे   को    पहचान  दिया 
जिसका   है  आभार  तुझे -

मेरी  रातें  दिन  मेरे   सब 
बख्सी    दात   तुम्हारी  हैं 
कर    पाँउ     तेरा    वंदन  
देना इतना अधिकार मुझे- 

खाक    तेरे   दर   की  होउं  
मेरा   भाग्य   उदय   होगा 
जब  नाव भंवर में मेरी हो
देना    तूं     पतवार   मुझे -  

छोड़   चले   कर   मेरा  मेरे  
तेरी   मुझे   पनाह    मिली 
तूं   दयाल  बख्संद  पियारा
देना    तूं    अंकवार   मुझे -

क्या    मांगू    दाते   तुमसे ,
जो   देना   तो   प्यार  मुझे -

                 -   उदय वीर सिंह 



3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (13-12-13) को "मजबूरी गाती है" (चर्चा मंच : अंक-1460) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

nice ji

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ईश्वर बस प्रेम बरसा दे, सूखे से इस मन उपवन में।