रविवार, 13 अप्रैल 2014

अहिंसा परमो धर्मः


मित्रों ! महान प्रवर्तक भगवान महाबीर के अवतरण दिवस पर मेरी बधाईया
 शुभकामनाएं - (अहिंसा परमो धर्मः )-
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अहिंसा की दीवारों से हिंसा के चित्र अब तो मित्र
उतार ले -
चुभेंगे दुश्मनों को ही नहीं तुम्हें भी,उन राहों से
कांटे बुहार ले -
वरना बाँचेगा सारी उम्र ख़ूनी अफसाने हाथों में अपने
अखबार ले -
शमशीरों से कभी अमन मिलता नहीं ढूंढते रह जाओगे माजी
चिराग ले -

उदय वीर सिंह

5 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर ।

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड की ९५ वीं बरसी - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (14-04-2014) के "रस्में निभाने के लिए हैं" (चर्चा मंच-1582) पर भी होगी!
बैशाखी और अम्बेदकर जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

महावीर को नमन।

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर सामयिक प्रस्तुति ..
महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनायें!
जय जिनेन्द्र!