सोमवार, 16 जून 2014

पिता [ the sky]


प्रेम का पगोढ़ा है                                

स्नेह की सांकल भी है-
धूप की  छाजन है 
आशीष का आँचल भी है -
आघातों का भंजक है 
संवेदनाओं का सम्बल भी है-
पीड़ा में प्रकाश पुंज है 
वेदनाओं का नाशक भी है -
डूबती निगाहों की ठौर 
सागर में  किश्ती 
आशाओं का आँगन भी है -
उँगलियों को आधार,
संस्कार को आकार देता 
पैरों का दिशा वाचक भी है -
जब भी आँखे नम हुईं
हाथ सिर पर पहले दिया 
देने को खुशियां स्नेह सारा 
वो देने वाला याचक भी है - 
सह लिया घावों को अपने 
रो लिया जब बोझिल हुआ 
न देख सका आंसू कभी  
कभी बसंत कभी सावन भी है- 
टुकड़ों में चाहे बँट गया 
हर आपदा से जूझता 
माँगा नहीं सिला कभी 
जीवन का अमृत आयन भी है -
जब लौट आती आश 
टकरा प्रस्तर भित्तियों से 
वात्सल्य की खुली बाहें लिए 
पिता संतान का शुभालय भी है-
आभार है आशीष है 
प्रबोध व प्रतिमान है 
कह सका न दर्द अपना 
त्याग ही प्रतिदान है -
सुखी रहो फूलो -फलो 
ये शब्द उच्चरित होते रहे 
संतान हित जिए मरे ये
एक  पिता का ख्याल भी है  -

                           - उदय वीर सिंह  


  



















7 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (16-06-2014) को "जिसके बाबूजी वृद्धाश्रम में.. है सबसे बेईमान वही." (चर्चा मंच-1645) पर भी है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (16-06-2014) को "जिसके बाबूजी वृद्धाश्रम में.. है सबसे बेईमान वही." (चर्चा मंच-1645) पर भी है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (16-06-2014) को "जिसके बाबूजी वृद्धाश्रम में.. है सबसे बेईमान वही." (चर्चा मंच-1645) पर भी है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Vaanbhatt ने कहा…

सुन्दर सन्देश पितृ दिवस पर...

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

आशा जोगळेकर ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति पितृदिवस पर।

Pratibha Verma ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।