सोमवार, 4 अगस्त 2014

कवि - तुलसी की शाला देखी -



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नील -गगन के स्मृति - वन में 
कवि - तुलसी  की  शाला देखी -
मैथिली शरण की काव्य मंजरी
जनमानस कर रस-हाला देखी -
नक्षत्र - द्वय  का प्रकाश- पर्व 
आलोकित  काव्य - धरा  देखी -
काव्य- धरा के साधक -जन के 
हाथों  जपते   में   माला   देखी-

                           - उदय वीर सिंह  



2 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत ख़ूब!