शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

गुरु - शिक्षक !


शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर सदैव स्मरणीय
 गुरु -शिक्षकों का शत-शत  वंदन ..
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गुरु - शिक्षक !
श्रेष्ठ है ,श्रद्धा है 
सुजान है ,सम्मान है 
भक्ति,प्रेरणा, आशा है ,
अभिमान है 
दीप है ,इससे प्रकाशित होते हैं दीप कितने   
मूल्य है मूल्यवान है 
उत्तर है अनंत प्रश्नों का 
स्रोत है ज्ञान पुंजों का ,
चराचर का संज्ञान है,
सृजन है संवेदना है 
बसंत है विस्वास का ,
मरूभूमि का नखलिस्तान है ...
वेदना पर विजय है , 
राग है प्रेम व आस्था का 
पावन है ,आचमन है संस्कारों का ,
समर्पण का प्रतिदान है 
सुधा कलश है 
माली है सुरमयी वीथियों का, 
सीढ़ी है सफलताओं की ,
क्षितिज है बीज का 
वल्लरी का आसमान है ..
शिक्षा का पात्र
शिक्षक महान है .......

- उदय वीर सिंह  




6 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति..शिक्षक दिवस की शुभकामनायें...

आशीष भाई ने कहा…

खूबसूरत लेखन व रचना , शिक्षक दिवस कि शुभकामनाएं , सर धन्यवाद !
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Neetu Singhal ने कहा…

गुरू वह है जो ज्ञान देता है, शिक्षक वह है जो शिक्षा देता है....,

ज्ञान :-- पदार्थ के मूल अंश को ग्रहण करने वाली चित्त की एक वृत्ति है..,
शिक्षा : -- चारित्रिक एवं मानसिक शक्तियों का विकास है..,
विद्या : -- किसी विषय का विशेष अध्ययन कर प्राप्त विशेषज्ञता, विद्या कहलाती है.....

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (06-09-2014) को "एक दिन शिक्षक होने का अहसास" (चर्चा मंच 1728) पर भी होगी।
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सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को नमन करते हुए,
चर्चा मंच के सभी पाठकों को शिक्षक दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत सुंदर ...शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

क्या बात वाह!