रविवार, 7 दिसंबर 2014

बेड़ी डूबती है -


आँधियाँ दे गईं ,तूफानों का नजराना
की बेड़ी डूबती है -

मजधार में मुसाफिर पतवार भी बेगाना
की बेड़ी डूबती है -

है माझी नशे में चूर मददगार है जमाना 
की बेड़ी डूबती है -

शाहिल कट गए हैं ,मौजें हैं कतिलाना
की बेड़ी डूबती है -

कागज की नाव पंछी, चाहे है पार जाना
की बेड़ी डूबती है -

हौसलों की कब्र साथ ले चाहे है आजमाना
की बेड़ी डूबती है -

उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (08-12-2014) को "FDI की जरुरत भारत को नही है" (चर्चा-1821) पर भी होगी।
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सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Lekhika 'Pari M Shlok' ने कहा…

bahut umda...