रविवार, 28 दिसंबर 2014

दशम पातशाह गुरु गोबिन्द सिंह जी


दशवें पातशाह ,गुरु गोबिन्द सिंह साहिब जी महाराज 
[ दिसंबर 1666 पटना शहर (बिहार) - अक्तूबर 1708 नांदेड़( महाराष्ट्र )] के पावन प्रकाश पर्व पर हृदय से आप सबको लख-लख बधाई एवं शुभकामनाएं,वाहे गुरु से सभी दुनियावी जीवों की खुशहाली व सलामती की अरदास ।
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उजड़े हुये थे बसाये गए हैं 
तेरे नूर से हम सजाये गए है -

हुए हम पाकीजा तेरा करम है ,
लाखों में हम एक बनाए गए हैं-

तेरी रहमतें बिन मागे मिली हैं
मुर्दे भी सोये जगाए गए हैं -

तू सबमें समाया,तेरा नूर दाते
सिर सिजदे में तेरे झुकाये गए हैं -

 उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (29-12-2014) को पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

dr.mahendrag ने कहा…

उत्तम अभिव्यक्ति