सोमवार, 26 जनवरी 2015

अभिशप्त नहीं मधुवंती अब ..



कुछ ख्वाब हकीकत बन चले
कुछ ख्वाब  हकीकत  होने हैं-
हैं  सरफ़रोशों  के वारिस  हम
कुछ ख्वाब  अभी  भी बोने हैं -

अभिशप्त  नहीं मधुवंती अब
सौभाग्य भरा दिनमान मिला
हतभाग्य तिरोहित वसुधा से
सृजन - सौभाग्य  सँजोने   हैं-

उदय वीर सिंह

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति।
गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.. आपको...।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (27-01-2015) को "जिंदगी के धूप में या छाँह में" चर्चा मंच 1871 पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
गणतन्त्रदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (27-01-2015) को "जिंदगी के धूप में या छाँह में" चर्चा मंच 1871 पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
गणतन्त्रदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'