शनिवार, 31 जनवरी 2015

अच्छा कहा -

हमने हर नजर, हर शख्श हर बज़्म
हर नज्म को अच्छा कहा -

गुजर गया, जो जा रहा अपने सफर 
हर मुसाफिर को अच्छा कहा -

ढ़ो लिया वजन अपने साथ ही औरों का 
समझदारों ने बच्चा कहा -

सच बोलता रहा ताउम्र ,झूठ ही माना गया
जब किया फरेब सबने सच्चा कहा -


जमाने की बात है जमाने से पूछिए ,
शराफत को जफा कहा ,कभी वफ़ा कहा -

उदय वीर सिंह  


1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (01-02-2015) को "जिन्दगी की जंग में" (चर्चा-1876) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'