रविवार, 10 मई 2015

हे माँ ! ..

Udaya Veer Singh's photo.

मातृ- दिवस ..[अर्पिता को अर्पित जीवन .. शत -शत वंदन ....]
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माँ दया की पात्र नहीं 
सृष्टि को शर्मिंदा न करो -
माँ बटवारे की वस्तु नहीं 
माँ गंगा है, गंदा न करो -
माँ पूजा अर्चन समिधा है
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा
माँ को शीश झुकाये जाते हैं
श्रद्धा को नंगा न करो -
करुणा त्याग दया की देवी
क्यो सिसके गलियों में
आरंभ तुम्ही से अंत तुम्हीं पर
पावन को पतिता न कहो -
उदय वीर सिंह

1 टिप्पणी:

अनूषा जैन ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ठ कृति का उल्लेख सोमवार की आज की चर्चा, "क्यों गूगल+ पृष्ठ पर दिखे एक ही रचना कई बार (अ-३ / १९७२, चर्चामंच)" पर भी किया गया है. सूचनार्थ.
~ अनूषा
http://charchamanch.blogspot.in/2015/05/blog-post.html