सोमवार, 25 मई 2015

विन्यास

विन्यास
कभी कुसुम की डार कभी
नागफनी की सेजों पर -
कहते जन्नत की हूर जिसे
रखा उनको है नेज़ों पर -
दिलो जिगर कहने वाले
बांटे समझौतों की मेजों पर -
गीता श्र्द्धा प्रज्ञा सीता कैसे
चित्रित हैं विकृत संदेशों पर -
पायल के स्वर रार अंतःपुर
गीत लगते हैं कोठों पर -
सात फेरे ले सात जन्मों की
छोड़ चले अंध - मोड़ों पर -
खुशियों का हक मंसूख हुआ
जीना है तो आदेशों पर -
पल्लू सरका तो संस्कार गए
आनंद मनाते देख कलरफ़ुल पेजों पर-
उदय वीर सिंह
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4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-05-2015) को माँ की ममता; चर्चा मंच -1987 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत बढ़िया

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत बढ़ि‍या

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/
http://mmsaxena69.blogspot.in/