रविवार, 7 जून 2015

अच्छा नहीं लगा -

हिन्दी का सम्मेलन ,अंगरेजियत का पैगाम 
अच्छा नहीं लगा -
आए थे श्रद्धांजलि सभा में जन्मदिन का बयान
अच्छा नहीं लगा -
मांग रहा था इंसाफ अपने हुए जुल्म का इंसान 
अच्छा नहीं लगा -
भींग गए सांत्वना में आए श्रीमान टूटा मकान
अच्छा नहीं लगा -
मांगने को विवश था इच्छा- मृत्यु  का वरदान 
अच्छा नहीं लगा -
जुल्म के तूफान से बर्बाद ,उठे दिल का तूफान 
अच्छा नहीं लगा -
मांगता रहा है रोटी कपड़ा मकान मजदूर किसान 
अच्छा नहीं लगा -
ताउम्र पाली हसरतें सींच ख्वाबों को खड़ा बागवान 
अच्छा नहीं लगा -

उदय वीर सिंह 




2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (08-06-2015) को चर्चा मंच के 2000वें अंक "बरफ मलाई - मैग्‍गी नूडल से डर गया क्‍या" (चर्चा अंक-2000) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

रश्मि शर्मा ने कहा…

मर्म छूती रचना..