गुरुवार, 13 अगस्त 2015

वांछित क्या है चयन कर लो ...

प्रज्ञा - परचम  अंबर लहराये
आधार स्तम्भ सृजन कर लो
जीवन -मृत्यु  अनुवंध खुले हैं
वांछित क्या है चयन कर लो -

पथ  पथरीले कंटक सज्जित
कुसुम -डार विस्थापित होगी
गंतव्य, मंचस्थ ऊंचे ठावों में
स्व अधिपत्य का प्रण कर लो -

मधुवंती का वर स्नेह होगा
दिवस देंगे शुभ-अवसर को
तप्त -ज्वाल  का वर्षण होगा
हिमवर्षण में भी गमन कर लो -


उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (14.08.2015) को "आज भी हमें याद है वो"(चर्चा अंक-2067) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति