शनिवार, 15 अगस्त 2015

राम वतन रहमान वतन है

मान वतन सम्मान वतन है
राम वतन ,रहमान वतन है 
रंग  वतन  है , राग वतन है
आन वतन है शान वतन है -

जीवन की  अक्षय - ऊर्जा है
सुबह वतन है शाम वतन है
कंगन कर ,माथे  की  बिंदी
मंदिर मस्जिद नाम वतन है -

परचम लहराये  विश्व गगन
जीवन की  पहचान  वतन  है
स्वांस स्वांस में वतन समाया
हृदय की सुंदर  गान वतन है -

राम कृष्ण गुरुओं का आँगन
देवों का ,सुंदर  धाम वतन है ,
दया ,प्रेम, करुणा  की  शाला
गीता ,ग्रंथ , कुरान  वतन  है -

उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (16-08-2015) को "मेरा प्यार है मेरा वतन" (चर्चा अंक-2069) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
स्वतन्त्रतादिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रचना दीक्षित ने कहा…

इस देशप्रेम के जज्बे को कोटि कोटि नमन.

सुंदर प्रस्तुति.