मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

गर्दिशी कहिए ....

बिना बयां किए बयां हो जाए 
उसे गर्दिशी.... कहिए -
चढ़ कर सिर बोले जनाब 
उसे खुशी कहिए -
बिक जाए अनमोल भरे बाजार 
उसे बेबसी कहिए - 
लुटा दे जींद परवाने की तरह 
उसे ख़ुदकुशी कहिए -
किसी हुस्न  को इश्क का चिराग दे दे 
उसे आशिक़ी कहिए -
दिलों की रहबरी का खर्चा उठाए 
उसे मैकशी कहिए -

उदय वीर सिंह 

2 टिप्‍पणियां:

Varun Mishra ने कहा…

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Kavita Rawat ने कहा…

बहुत खूब!