रविवार, 6 दिसंबर 2015

मलाल है जिंदगी से

 

 
क्यों    मिलता  है  ऐसा    हाल,
मलाल   है ,     जिंदगी       से -

क्या   पहनने  ओढ़ने  को  सिर्फ
दर्द  ही   हैं,  सवाल  है  जिंदगी से-

भूख ,   कचरों  में ढूंढ़  थक  गयी
मासूमियत  भी लाचार जिंदगी से -

कभी  दे  सको  तो इस्तहार देना
कितना  है इनको प्यार जिंदगी से -

धर्म, संसद, कानून का कितना रह
गया   है ,  सरोकार   जिंदगी   से  -

मिला किसी को नूर,दौलत माँ-बाप
किसका है इनको अब तक इंतजार ..... ?
है सवाल जिंदगी  से-...... |







2 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 07 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Rewa tibrewal ने कहा…

Sahi baat...umda