रविवार, 6 मार्च 2016

वतन है तो हम हैं ,वरना बे-कफन हैं-
आदर्श हमारे आयातित नहीं हो सकते
हम मुकम्मल हैं इतने हमारे फन हैं -
स्टेलिन हिटलर की सभ्यता माँगूँ
हमारे आदर्श हमारे गुरुओं के वचन हैं -
इस देश की मिट्टी पानी हवा अमृत है
प्रेम मानवीयता ही आँखों के अंजन हैं -
सुर-असुर अंध बीमार मानसिकता है 
सदाचार समानता हृदय के स्पंदन हैं -


उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 07 मार्च 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और बेहतरीन प्रस्तुति, महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें।