रविवार, 8 मई 2016

जरूरत से ज्यादा कब

दुनियाँ भर की माओं की चरण वंदना -
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जरूरत से ज्यादा कब
उदय तुमसे मांगा कब
मोहब्बत की जिंदगी में
नफ़तर को मांगा कब -
रखिया भरोषा रब से
दुनियाँ से मांगा कब
दो बोल प्यार के अरदास मेरी है
गुलशन मांगा तो
कांटों को मांगा कब -
खुशी एक पल की जहालत से चंगी है
आँखों में आँसू हमने
दामन में मांगा कब -
उदय वीर सिंह   


2 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाओं सहित , " ब्लॉग बुलेटिन की मदर्स डे स्पेशल बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (09-05-2016) को "सब कुछ उसी माँ का" (चर्चा अंक-2337) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'