सोमवार, 20 जून 2016

त्यागो नशा. मद को पीना न सीखो -

कभी गम के हाथों बिकना सीखो
किसी की बुलंदी से जलना सीखो -
दिन गर्दिशी के मोहब्बत के दिन हों
कभी गुरबती से डरना सीखो -
जियो सिर उठाकर ले रब का भरोषा
कभी कायरों सा ,मरना सीखो -
कदम लड़खड़ाने से पहले संभलना
कभी दाग बनकर जीना सीखो -
सच्चे पातशाहों ने बख्सा है अमृत
त्यागो नशा मद को पीना सीखो -

उदय वीर सिंह 


1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (21-06-2016) को "योग भगाए रोग" (चर्चा अंक-2380)) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'