रविवार, 10 जुलाई 2016

नेह पनपेगा हृदय ....

नेह पनपेगा हृदय
चिर- मंगल होगा -
विरह वीथियों का रोह
असफल होगा -
वेदना उष्मित पथ होगी
शीश आँचल होगा -
पीर निर्मित होगी
यत्न निष्फल होगा -
नयनों की सौम्यता में
स्नेह अंजन होगा -
उल्लास उत्सव होगा
प्रेम प्रांजल होगा -

उदय वीर सिंह



1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (11-07-2016) को "बच्चों का संसार निराला" (चर्चा अंक-2400) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'