बुधवार, 20 जुलाई 2016

महसूस कीजिये -

दर्द कितना कहेगा दर्द को महसूस कीजिये 
कुछ फर्ज हैं हमारे ,फर्ज महसूस कीजिये -
अहसान हैं कुछ हम पर आए खयाल जो 
चुकाना भी है हमको कर्ज महसूस कीजिये -
सिर्फ तूफान ही नहीं हैं गुब्बार की वजह 
हवाएँ भी हैं मुखालिफ गर्द महसूस कीजिये -
पहचान भी है मुश्किल अपने पराए की 
अपना दिल भी नहीं हमदर्द महसूस कीजिये -

उदय वीर सिंह 

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (21-07-2016) को "खिलता सुमन गुलाब" (चर्चा अंक-2410) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 21 जुलाई 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 21 जुलाई 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बढ़िया