रविवार, 14 अगस्त 2016

हम हिंदुस्तानी पहले

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर समस्त भारतवासियों को लख-लख बधाई -
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आओ ढूंढ लेते हैं अपनी विरासत को
वास्ता वतन से है छोड़ दें सियासत को -

सूही - सूही जिंदगी निसारी वतन पे है
सिजदा शहीदों को उनकी सहादत को -
रोया सितम था ,वो वीर  सरफरोश थे 
इसरार मौत थी, वतन की हिफाजत को -
वन्देमातरम ही लिखा जख्मों से बहता खून 
आजादी के गीत लिखे दिल की किताबों को  -
ज़र्रों ने लिखा हम जन्नत न चाहते
हम हिंदुस्तानी पहले वतन की इबादत को -

उदय वीर सिंह 

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (16-08-2016) को "एक गुलाम आजाद-एक आजाद गुलाम" (चर्चा अंक-2436) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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७० वें स्वतन्त्रता दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Asha Joglekar ने कहा…

हम हिन्दुस्तानी पहले हैं वतन की हिफाजत को। काश यह हम सब हर पल याद रखें, क्या जनता क्या नेता। क्या मंत्री क्या संत्री।