सोमवार, 12 दिसंबर 2016

साक्ष्य समय का मौन रहा -

अशेष, अवशेष का वाचन किया भी जाए तो कैसे और किससे ? आवरण मे ढके ईर्ष्या और आघात, स्वस्थ पृष्ठभूमि का निर्माण करने के कारक मानने का कोई कारण नहीं दिखता -
साक्ष्य समय का मौन रहा -
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क्यों लिखते हो गीतों को
सद गाने वाला कौन रहा
जिसने देखी खून की होली
साक्ष्य समय का मौन रहा -
टूटा नभ अचला कंपित
दिग दिगंत निरपेक्ष रहे
जिसने खेली खून की होली
हर दंड न्याय से मुक्त रहा -
तर्कों और वक्तव्यों का आदर्श
अप्रतिम रत्न सा गढे गए
विप्लव विदोह द्रोह का मंडन
उर न्याय प्रतीक्षित दग्ध रहा -
कंठस्थ हुए विकृत शब्द युग्म
संवेदन सम्प्रेषण कितना सूना
भाषा का गरल सम्मोहन वांछित
नायक प्रबोध का कौन रहा -
दहकी ज्वाला अन्याय कृतघ्न की
अतिचारी की चेरी शक्ति है
शील शुचिता का वाचक रोता
मदांध प्रलापी निर्विघ्न रहा -

अंगार बने पथ प्रेम नगर के
पीयूष प्रवाह अवरुद्ध हुआ
सत्य सरित का अवसान हुआ
सदाचार का नीरज लोप रहा -

उदय वीर सिंह




1 टिप्पणी:

Praveen Pandey ने कहा…

समय कहाँ कुछ कहता है, वह तो बस कर देता है।