रविवार, 18 दिसंबर 2016

टुकड़ों में जीवन कितना ....

टुकड़ों में जीवन कितना
सिया भी करो -
प्याला भरा प्रीत का
पिया भी करो -
काँटों के दर्द से मायूस होते क्यों
खुशियों की आश में
जिया भी करो -
पत्थर न होते तो घर भी न होते वीर
शीशे रोशनी के जानिब
चुना भी करो -

उदय वीर सिंह

2 टिप्‍पणियां:

Praveen Pandey ने कहा…

सुन्दर भाव

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (19-12-2016) को "तुम्हारी याद स्थगित है इन दिनों" (चर्चा अंक-2561) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'