मंगलवार, 28 मार्च 2017

संवेदन भी खैरात नहीं हैं -

कविता है हालात  नहीं हैं
समस्याएँ हैं सवालात नहीं हैं
हैं घूम रहे छुट्टा पशुओं सम
अपराधी हैं हवालात नहीं हैं -
खामोश हुये लब कैसे कैसे
पीड़ा है खयालात नहीं हैं -
बहता खून है सड़कों पर
रोगी को इमदाद नहीं हैं -
रो रो मांगे  खैर मुकद्दर 
संवेदन भी खैरात नहीं हैं -

उदय वीर सिंह 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (30-03-2017) को

"स्वागत नवसम्वत्सर" (चर्चा अंक-2611)

पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'