शनिवार, 15 अप्रैल 2017

खोखली जड़ों के पेड़ जिंदा नहीं रहते

तूने जिसे छूआ  नहीं अछूत समझकर 
दुनियाँ ने अपनायाउसे सपूत समझकर 
ईश्वर ने बनाया जीव बनाई तुमने जाति
मानवता ने अपनाया उसे दूत समझकर 
खोखली जड़ों के पेड़ जिंदा नहीं रहते 
परिंदे भी छोड़ जाते हैं कमजोर समझ कर -
उदय वीर सिंह 

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (16-04-2017) को
"खोखली जड़ों के पेड़ जिंदा नहीं रहते" (चर्चा अंक-2619)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सटीक

Chandra Bhushan ने कहा…

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