रविवार, 24 जून 2018

आप के इंतजार में ख्वाब ...

आप के इंतजार में ख्वाब बैठे हैं
वो कह रहे थे हम जाग बैठे हैं -
बिछी है मगहर में कमली उनकी
आप काशी काबा प्रयाग बैठे हैं -
आसमां एक जमीं मिली कमोबेस सबको
आप हैं की ले नया राग बैठे हैं -
कोयल की मांग थी जमाने को
कंगूरो बाग में अब काग बैठे हैं -
ग्रंथ कहते हैं मानवता से बड़ा कोई
ये सूत्र वाक्य भी त्याग बैठे हैं
सहेज रखता है पन्नो को माजी
गौर से देखिए कितने दाग बैठे हैं -
आस्तीन में न्याय प्रेम रखिए
टटोल कर देखिए नाग बैठे हैं
भरोषा रखिए मीरीऔर पीरी का
गुरुज्ञान के तमस में चिराग बैठे हैं -
उदय वीर सिंह

4 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, वीरांगना रानी दुर्गावती का ४५४ वां बलिदान दिवस “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

kuldeep thakur ने कहा…

जय मां हाटेशवरी...
अनेक रचनाएं पढ़ी...
पर आप की रचना पसंद आयी...
हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 26/06/2018
को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की गयी है...
इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

Kusum Kothari ने कहा…

वाह लाजवाब ।

Digamber Naswa ने कहा…

बहुत खूब ...
कुछ शेर तो गज़ब हैं ... अपनी बात को कहने का लाजवाब अंदाज़ लिए ...