मंगलवार, 26 नवंबर 2013

जन्म लेती प्रीत अंतस



जन्म    लेती    प्रीत   अंतस 

तब   सृजन   आकार   लेता -
अद्दभुत प्रगल्भ कोपलों  को 
नव     प्रखर    आधार   देता -

बिहँस    उठता  मान  पियूष 
पल    मंजरी    की   गोंद  में ,
चिर प्रतीक्षित सौंदर्य श्यामा
सौम्य   नवल   संसार   देता - 

उत्सव   सहेजे    अंक  बसुधा 
संज्ञान    सलिला    बह   चले 
हो निंमज्जित स्नेह - रस में 
शुभ भाव - प्रवर आभार देता -

संवेदनाएं       बांचती       कथ    
वेदन- पृष्ठ   की    हर   पंक्तियाँ 
लालित्य  का  प्रतिमान   बांधे 
शौर्य का अप्रतिम संसार  देता 

                                   उदय वीर सिंह 

3 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

सुंदर प्रखर भाव एवं अभिव्यक्ति ...!

travel ufo ने कहा…

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

welcome to Hindi blog reader

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सृजन के सुन्दर भाव..