रविवार, 28 नवंबर 2021

नयन जागते रहे....


 








अजनवियों कीभीड़अपना तलाशता रहा।

नयन जागते रहे सपना तलाशता रहा।

पहचान कर सब ले गए अपनीअमानतें

मेरी कहाँ बचीं हर कोना तलाशता रहा।

बोई उम्मीद की फसल बरसात ले गई,

वायदों की थाली, दाना तलाशता रहा।

मुख़्तलिफ़ किताबों के पन्ने पलट गया,

जाती ज़िंदगीका अफ़साना तलाशता रहा।

उदय वीर सिंह।

9 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (29 -11-2021 ) को 'वचनबद्ध रहना सदा, कहलाना प्रणवीर' (चर्चा अंक 4263) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

#रवीन्द्र_सिंह_यादव

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (29 -11-2021 ) को 'वचनबद्ध रहना सदा, कहलाना प्रणवीर' (चर्चा अंक 4263) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

#रवीन्द्र_सिंह_यादव

मन की वीणा ने कहा…

उम्दा , भावुकता से भरी प्रस्तुति।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

तलाश ! ताउम्र ख़त्म नहीं होती !

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

यदि हो सके या दिक्कत ना हो तो मॉडरेशन हटा लें

Manisha Goswami ने कहा…

बहुत ही शानदार

Bharti Das ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति

Bharti Das ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति