शुक्रवार, 22 मार्च 2013

शहीदे आजम


शहीदे आजम सरदार भगत सिंह की कुर्बानी की पूर्व संध्या पर मेरे अहसानमंद दिल की विनम्र श्रद्धांजलि 
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गम   नहीं कि मेरी  आवाज  गूंजती   नहीं
तेरी  आवाज ही काफी है सरफरोशी के लिए- 

फख्र   है  ,तेरी  मज़ार आग  का दरिया  है 
नहाते   हैं   वतनपरस्त , गद्दार  डूबते   हैं    -

एक तेरी फितरत थी वतन को मां कहने की
एक वो थे, जिन्हें  माँ  कहना  नहीं आया  -

तेरी  कुर्बानी  के कर्जदार हैं शहीदे- आजम 
तेरा  मुकाम  ऊँचा  है तेरे शाये  में जीते  हैं  -

तेरी  रुखसती  में  फ़क़ीर ! माँ  नहीं रोई थी  
आज रोती  है ,आँखों  में तेरा अक्स  नहीं  दिखता  - 

तेरे पावों के निचे खड़े पियादों की बिसात क्या  
तूं  ऊँचा  तेरा  मुकाम  ऊँचा  है  -

                             उदय वीर सिंह 



  







  

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जिगरा दिखा दिया माटी के सपूत ने..

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

शहीद भगत सिंह को मेरा शत शत नमन | अहोभाग्य भारतमाता के जो ऐसे लाल ने यहाँ जन्म लिया और बलिदान दिया | शीश नवा कर मेरा कोटि कोटि प्रणाम |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (23-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

'एक तेरी फितरत थी वतन को मां कहने की
एक वो थे, जिन्हें माँ कहना नहीं आया'
-
अब तो वही हैं जिन्हें माँ कहना नहीं आया,
इसलिये जब तू याद आया मेरा दिल भर आया!

Pratibha Verma ने कहा…

शत - शत नमन ऐसे वीर को ...
पधारें "चाँद से करती हूँ बातें "

Aziz Jaunpuri ने कहा…

भारतमाता के सपूत शहीद भगत सिंह को मेरा शत शत नमन;